हे मेरे परमेश्वर, हे राजा मैं तुझे सराहूँगा, और तेरे नाम को सदा सर्वदा धन्य कहता रहूँगा।

*“हे मेरे परमेश्वर, हे राजा मैं तुझे सराहूँगा, और तेरे नाम को सदा सर्वदा धन्य कहता रहूँगा।” (भजन संहिता १४५: १)*

 

जब जब आप प्रार्थना करने के लिये घुटने टेकते हैं तब तब कोई भी बिनती करने से पहले प्रभु को बड़ा मनाईये और वह जो है उसके लिये उसका भजन करें। आपके लिये वह सबसे ऊपर कैसे ऊँचे स्थान में विराजमान है उसे समझें। उसके बाद प्रार्थना करना आपके लिये आनन्दमय होगा। नहीं तो थोड़े ही मिनटों में घुटने दु:खने लगेंगे और बादमें पेट में, सिर में, कान में दुःखना शुरु होगा और दूसरे कई प्रकार के कष्ट बढ़ जायेंगे। बाद में आप सोने की तैयारी करते हैं और कहते हैं, ‘मैं कल प्रार्थना करूँगा। प्रभु जानता है कि मैं कितना ज्यादा थक गया हूँ। कल रात मुझे सोते वक्त चार बज गये थे। इसलिये अभी किस रीति से प्रार्थना कर सकता हूँ?’ उसके बाद आपकी प्रार्थना ईतनी ही रहेगी, ‘प्रभु, मुझे आशिष दो, सभों को आशिष दो।’ इसलिये प्रार्थना करने के पूर्व उपासना करें। प्रार्थना करने के लिये यह टोनिक बन जायेगा; आप प्रार्थना में ताजगी अनुभव करेंगे और थकान नहीं लगेगा। इसी रीति से वचन की सेवा करते समय या गवाही देते समय यही बात कहें, जिससे प्रभु को मान मिले और न कि आपको। जितना आप प्रभु को सम्मानित करेंगे उतना ही सामर्थ आपको मिलेगा। उसके गौरवशाली नाम को अंगीकार करने में कभी लजायें नहीं। इस रीति से परमेश्वर का जीवन आप में और आपके द्वारा बहता रहेगा।

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*