“… पहले ही दिन को जब तू ने बूझने के लिए मन लगाया और अपने परमेश्वर के सामने अपने को दीन किया, उसी दिन तेरे वचन सुने गए” (दानिय्येल 10:12)।

पहले ही दिन को जब तू ने बूझने के लिए मन लगाया और अपने परमेश्वर के सामने अपने को दीन किया, उसी दिन तेरे वचन सुने गए" (दानिय्येल 10:12)।

उपवास की मिठास!

“… पहले ही दिन को जब तू ने बूझने के लिए मन लगाया और अपने परमेश्वर के सामने अपने को दीन किया, उसी दिन तेरे वचन सुने गए” (दानिय्येल 10:12)।

उपवास दानिय्येल के लिए एक खुशी की बात थी। उपवास के दिन वे दिन थे जिनमें वह खुशी से परमेश्वर के करीब जाता था और वह परमेश्वर के रहस्य की बातों को समझ सकता था। हांलाकि, उपवास के कारण उसका शरीर कमजोर हो गया, लेकिन उसकी आत्मा प्रभुओं के प्रभु से मिलने में आनन्दित होती थी।

कुछ साल पहले, सरकार को एक सूचना मिली की हिमालय के पास के एक गाँव में एक बाघ वहाँ रहने वाले इंसानों का शिकार कर रहा था। जब सरकार ने बाघ का अकेले इंसानों पर हमला करने का कारण जांच किया, तो वे जिस निष्कर्ष तक पहुंचे,आपको पता है कि वह क्या है? एक बार, एक अंतिम संस्कार के दौरान, गाँव के लोगों ने एक मृत शरीर को जमीन में आधा जला के छोड़ दिया था और उनके जाने के बाद, बाघ जो वहाँ गया, उसने आधा जला हुआ शरीर खा लिया। उस बाघ के लिए अन्य सभी जानवरों के मांस की तुलना में मानव मांस सबसे स्वादिष्ट था, उस दिन से बाघ ने पुरुषों और महिलाओं का शिकार करने की आदत बना ली।

कोई भी चीज हो सकती है, अगर किसी आदमी को कुछ पसंद आता है, तो वह उसके उसके पीछे पड़ जाता है। उसी तरह, जो लोग उपवास का स्वाद चख लेते हैं उन्हें परमेश्वर की उपस्थिति भी बड़ी मीठी लगती है। इस आनंद का स्वाद लेने के लिए, वे बार-बार परमेश्वर की उपस्थिति में उपवास के लिए आते हैं। उपवास का स्वाद इतना शानदार है। जैसे ही वे फिर से उपवास करते हैं, वे उस में मगन हो जाते हैं, और हर थोड़े-थोड़े समय पर उपवास करना शुरू कर देते हैं। मुझे यह देखकर दुख होता है कि कई लोग उपवास की मिठास से अभी भी अनजान हैं। वे परमेश्वर के निमित्त एक वक्त का भोजन भी त्यागना नहीं चाहते।

लेकिन इतिहास को देखें। परमेश्वर द्वारा उसकी सेवकाई में सामर्थी रुप से इस्तेमाल किये गये हर सेवक को देख सकते हैं, वे उपवास में जो मिठास और उसकी महिमा है उसे अच्छी तरह से जानते हैं। मार्टिन लूथर, जो कई आत्मिक सुधार लाए थे, वे कई दिन और रात तक लगातार उपवास करते थे। हालांकि उनके स्वास्थ्य को एक बड़ा झटका लगा और यह संदेहास्पद था कि वह जीवित भी रह पाएंगे या उनके जीवन को छोड़ देंगे, लेकिन उन्होंने उपवास करना बंद नहीं किया।

चौदहवीं शताब्दी में, सवोनरोला नाम के एक संत ने इटली में एक महान पुनरुत्थान किया। उनके प्रचार लोगों पर आग की चिंगारी की तरह लगते थे । उनकी सेवकाई के सफलता के पीछे का रहस्य उपवास की प्रार्थना के अलावा और कुछ नहीं था। इतिहासकार कहते हैं कि वह वेदी पर कभी भी बिना उपवास के नहीं पहुंचे।

परमेश्वर के प्यारे बच्चों, परमेश्वर आपसे उपवास वाली प्रार्थना की अपेक्षा करता है ताकि वर्तमान पीढ़ी उसके पास आए।

ध्यान करने के लिए: “पर यह जाति बिना प्रार्थना और उपवास के नहीं निकलती” (मत्ती 17:21)।

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सुबह – यशायाह : 41,42
संध्या – 1 थिस्सलुनीकियों : 1

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