स्तिफनुस अनुग्रह और सामर्थ से परिपूर्ण होकर लोगों में बड़े – बड़े अद्‌भुत काम और चिन्ह दिखाया करता था।

“स्तिफनुस अनुग्रह और सामर्थ से परिपूर्ण होकर लोगों में बड़े – बड़े अद्‌भुत काम और चिन्ह दिखाया करता था।”

(प्रेरितो के काम ६: ८)

   विधवाओं की सुधिलेने के लिये और अन्य कामों के लिये स्तिफनुस को चुना गया था। 
परन्तु थोडे़ ही समय मैं यह दिखाई दिया कि वह विश्वास से भरपूर जन था। वह दूसरों से
पैसे नहीं मांगता था। वह कह सकता था, ‘पूरी मण्डली ने इन लोगों की देख-भाल करने के लिये मुझे चुना है।
अब यरूशलेम में इतनी विधवाए, इतने बालक और दूध पीते बच्चें हैं। उनके पोषण के लिये ज्यादा पैसे दीजिये।’
परन्तु उसने ऐसा नहीं किया। आप भी परमेश्वर पर विश्वास रखना सीखें। वह तो जीवित,
पराक्रमी और न बदलनेवाला परमेश्वर है। वह सब कुछ कर सकता है।
क्योंकर उसके दासों को भीख माँगनी चाहिये? क्या इसलिए की उन्हें विश्वास नहीं?
स्तिफनुस विश्वासपूर्ण जन था। विश्वास के द्वारा जरूरतें पूरी होते हुई वह देख सका।
परमेश्वर ने आश्चर्यकर्म किये और इस प्रकार स्तिफनुस को उस कार्य के लिये उसीने चुना था
इसे प्रगट किया। क्या परमेश्वर ने आपको चुना हैं? आप उसकी इच्छा पूरी करने के लिये तैयार हैं तो वह आपको चुनेगा और
आपको विश्वास से भरा जन बनायेगा, परमेश्वर के आश्चर्य कामों को आपको दिखायेगा।
वह तो जीवित परमेश्वर है। प्रेरितों के काम ६:१० में हम पढ़ते हैं,
‘परन्तु उस ज्ञान और उस आत्मा का जिससे वह बातें करता था,
वे साम्हना न कर सके।’ स्तिफनुस उसका काम करता रहा और साथ ही
साथ जो उससे मिलते उन सबको परमेश्वर का वचन देता रहा। वह तो एक नम्र
साधारण मनुष्य था परन्तु परमेश्वर की आत्मा से भरपूर था और ईश्वरीय ज्ञान से भी परिपूर्ण था
जिसके द्वारा पढे़ हुओं के मुँह वह बंद कर सका। आप परमेश्वर के आधीन होते जाएँगे वैसा वह
आपको ईश्वरीय ज्ञान देगा जिससे आप हरेक परिस्थिति को पहुँच सकेंगे और वह
आपको उसका चुना हुआ पात्र बनायेगा।

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