यीशु का यरूशलेम में विजय प्रवेश

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यीशु का यरूशलेम में विजय प्रवेश

जब वे यरूशलेम के निकट पहुँचे और जैतून पहाड़ पर बैतफगे के पास आए तो

यीशु ने दो चेलों को यह कहकर भेजा

 

अपने सामने के गाँव में जाओ वहाँ पहुँचते ही एक गदही बंधी हुई और

उसके साथ बच्चा तुम्हें मिलेगा उन्हें खोलकर मेरे पास ले आओ।

यदि तुम से कोई कुछ कहे तो कहो कि प्रभु को इनका प्रयोजन है तब

वह तुरन्त उन्हें भेज देगा।

 

यह इसलिए हुआ कि जो वचन भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा गया था वह पूरा हो

सिय्योन की बेटी से कहो

देख तेरा राजा तेरे पास आता है

वह नम्र है और गदहे पर बैठा है

वरन् लादू के बच्चे पर।

चेलों ने जाकर जैसा यीशु ने उनसे कहा था वैसा ही किया।

 

और गदही और बच्चे को लाकर उन पर अपने कपड़े डाले

और वह उन पर बैठ गया।

 

और बहुत सारे लोगों ने अपने कपड़े मार्ग में बिछाए और लोगों ने

पेड़ों से डालियाँ काटकर मार्ग में बिछाईं।

 

और जो भीड़ आगे-आगे जाती और पीछे-पीछे चली आती थी पुकार-पुकारकर कहती

थी दाऊद के सन्तान को होशाना धन्य है वह जो प्रभु के नाम से आता है आकाश में होशाना।

 

जब उसने यरूशलेम में प्रवेश किया तो सारे नगर में हलचल मच गई

और लोग कहने लगे यह कौन है

 

लोगों ने कहा यह गलील के नासरत का भविष्यद्वक्ता यीशु है।

मन्दिर की सफाई

यीशु ने परमेश्‍वर के मन्दिर में जाकर उन सब को जो मन्दिर में लेन-देन कर रहे थे

निकाल दिया और सर्राफों के मेज़ें और कबूतरों के बेचनेवालों की चौकियाँ उलट दीं।

 

और उनसे कहा लिखा है मेरा घर प्रार्थना का घर कहलाएगा परन्तु तुम

उसे लुटेरों का अड्डा बनाते हो।

और अंधे और लँगड़े मन्दिर में उसके पास आए और उसने उन्हें चंगा किया।

 

परन्तु जब प्रधान याजकों और शास्त्रियों ने इन अद्भुत कामों को जो उसने

किए और लड़कों को मन्दिर में दाऊद की सन्तान को होशाना पुकारते हुए देखा तो क्रोधित हुए

 

और उससे कहने लगे क्या तू सुनता है कि ये क्या कहते हैं यीशु ने उनसे कहा

हाँ क्या तुम ने यह कभी नहीं पढ़ा बालकों और दूध पीते बच्चों के मुँह से तूने स्तुति सिद्ध कराई

 

तब वह उन्हें छोड़कर नगर के बाहर बैतनिय्याह को गया और वहाँ रात बिताई।

अंजीर के पेड़ से शिक्षा

भोर को जब वह नगर को लौट रहा था तो उसे भूख लगी।

 

और अंजीर के पेड़ को सड़क के किनारे देखकर वह उसके पास गया और

पत्तों को छोड़ उसमें और कुछ न पा कर उससे कहा अब से तुझ में फिर

कभी फल न लगे और अंजीर का पेड़ तुरन्त सुख गया।

 

यह देखकर चेलों ने अचम्भा किया और कहा यह अंजीर का पेड़ तुरन्त कैसे सूख गया?

 

यीशु ने उनको उत्तर दिया मैं तुम से सच कहता हूँ यदि तुम विश्वास रखो और

सन्देह न करो तो न केवल यह करोगे जो इस अंजीर के पेड़ से किया गया है परन्तु

यदि इस पहाड़ से भी कहोगे कि उखड़ जा और समुद्र में जा पड़ तो यह हो जाएगा।

 

और जो कुछ तुम प्रार्थना में विश्वास से माँगोगे वह सब तुम को मिलेगा।

यहूदी अगुओं का यीशु के अधिकार पर संदेह

वह मन्दिर में जाकर उपदेश कर रहा था कि प्रधान याजकों और लोगों के प्राचीनों ने

उसके पास आकर पूछा तू ये काम किस के अधिकार से करता है

और तुझे यह अधिकार किस ने दिया है

 

यीशु ने उनको उत्तर दिया मैं भी तुम से एक बात पूछता हूँ यदि वह

मुझे बताओगे तो मैं भी तुम्हें बताऊँगा कि ये काम किस अधिकार से करता हूँ।

 

यूहन्ना का बपतिस्मा कहाँ से था स्वर्ग की ओर से या मनुष्यों की ओर से था तब वे

आपस में विवाद करने लगे यदि हम कहें स्वर्ग की ओर से तो वह हम से कहेगा

की फिर तुम ने उसका विश्वास क्यों न किया

 

और यदि कहें मनुष्यों की ओर से तो हमें भीड़ का डर है क्योंकि वे सब

यूहन्ना को भविष्यद्वक्ता मानते हैं।

 

अत उन्होंने यीशु को उत्तर दिया हम नहीं जानते। उसने भी उनसे कहा तो मैं भी

तुम्हें नहीं बताता कि ये काम किस अधिकार से करता हूँ।

दो पुत्रों का दृष्टान्त

तुम क्या समझते हो किसी मनुष्य के दो पुत्र थे उसने पहले के पास जाकर कहा

हे पुत्र आज दाख की बारी में काम कर।

 

उसने उत्तर दिया मैं नहीं जाऊँगा परन्तु बाद में उसने अपना मन बदल दिया और चला गया।

 

फिर दूसरे के पास जाकर ऐसा ही कहा उसने उत्तर दिया जी हाँ जाता हूँ परन्तु नहीं गया।

 

इन दोनों में से किस ने पिता की इच्छा पूरी की उन्होंने कहा पहले ने। यीशु

ने उनसे कहा मैं तुम से सच कहता हूँ कि चुंगी लेनेवाले और वेश्या तुम से पहले

परमेश्‍वर के राज्य में प्रवेश करते हैं।

 

क्योंकि यूहन्ना धार्मिकता के मार्ग से तुम्हारे पास आया और तुम ने उस पर

विश्वास नहीं किया पर चुंगी लेनेवालों और वेश्याओं ने उसका विश्वास किया और

तुम यह देखकर बाद में भी न पछताए कि उसका विश्वास कर लेते।

दुष्ट किसानों का दृष्टान्त

एक और दृष्टान्त सुनो एक गृहस्थ था जिसने दाख की बारी लगाई और उसके

चारों ओर बाड़ा बाँधा और उसमें रस का कुण्ड खोदा और गुम्मट बनाया और

किसानों को उसका ठेका देकर परदेश चला गया।

 

जब फल का समय निकट आया तो उसने अपने दासों को उसका

फल लेने के लिये किसानों के पास भेजा।

 

पर किसानों ने उसके दासों को पकड़ के किसी को पीटा और किसी को

मार डाला और किसी को पत्थराव किया।

 

फिर उसने और दासों को भेजा जो पहलों से अधिक थे और उन्होंने

उनसे भी वैसा ही किया।

 

अन्त में उसने अपने पुत्र को उनके पास यह कहकर भेजा कि वे मेरे

पुत्र का आदर करेंगे।

 

परन्तु किसानों ने पुत्र को देखकर आपस में कहा यह तो वारिस है

आओ उसे मार डालें और उसकी विरासत ले लें।

 

और उन्होंने उसे पकड़ा और दाख की बारी से बाहर निकालकर मार डाला।

इसलिए जब दाख की बारी का स्वामी आएगा तो उन किसानों के साथ क्या करेगा?

 

उन्होंने उससे कहा वह उन बुरे लोगों को बुरी रीति से नाश करेगा

और दाख की बारी का ठेका और किसानों को देगा जो समय पर उसे फल दिया करेंगे।

 

यीशु ने उनसे कहा क्या तुम ने कभी पवित्रशास्त्र में यह नहीं पढ़ा

जिस पत्थर को राजमिस्त्रियों ने बेकार समझा था

वही कोने के सिरे का पत्थर हो गया

यह प्रभु की ओर से हुआ और हमारे

देखने में अद्भुत है।

इसलिए मैं तुम से कहता हूँ कि परमेश्‍वर का राज्य तुम से ले लिया

जाएगा और ऐसी जाति को जो उसका फल लाए दिया जाएगा।

 

जो इस पत्थर पर गिरेगा वह चकनाचूर हो जाएगा और जिस पर

वह गिरेगा उसको पीस डालेगा।

 

प्रधान याजकों और फरीसी उसके दृष्टान्तों को सुनकर समझ

गए कि वह हमारे विषय में कहता है।

 

और उन्होंने उसे पकड़ना चाहा परन्तु लगों से डर गए क्योंकि

वे उसे भविष्यद्वक्ता जानते थे।

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