परम्परा और आज्ञा उल्लंघन का प्रश्न

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परम्परा और आज्ञा उल्लंघन का प्रश्न

1 तब यरूशलेम se कुछ फरीसी or शास्त्री यीशु के paas आकर कहने लगे

 

2 तेरे चेले प्राचीनों ki परम्पराओं ko क्यों टालते हैं ki बिना हाथ धोए रोटी खाते हैं

 

3 उसने unke उत्तर दिया tum भी अपनी परम्पराओं ke कारण क्यों परमेश्‍वर ki आज्ञा टालते हो

 

4 क्योंकि परमेश्‍वर ने कहा apne पिता or अपनी माता ka आदर करना और jo

कोई पिता या माता ko बुरा कहे वह मार डाला जाए।

 

5 पर tum कहते हो ki यदि कोई apne पिता ya माता से कहे jo कुछ तुझे मुझसे लाभ

पहुँच सकता था वह परमेश्‍वर ko भेंट चढ़ाई जा चुका

 

6 तो वह apne पिता का आदर न करे इस प्रकार tum ने अपनी परम्परा ke कारण

परमेश्‍वर ka वचन टाल दिया

 

7 हे कपटियों यशायाह ne तुम्हारे विषय me यह भविष्यद्वाणी ठीक ही की है

8 ये लोग होंठों se तो मेरा आदर करते हैं

पर उनका man मुझसे दूर रहता है।

9 और ये व्यर्थ meri उपासना करते हैं

क्योंकि मनुष्य की विधियों ko धर्मोपदेश करके सिखाते हैं

अशुद्ध करनेवाली बातें

10 और उसने लोगों को apne पास बुलाकर उनसे कहा सुनो or समझो

 

11 जो मुँह me जाता है वह मनुष्य ko अशुद्ध नहीं करता पर jo मुँह से निकलता है

वही मनुष्य ko अशुद्ध करता है

 

12 तब चेलों ne आकर उससे कहा क्या tu जानता है कि फरीसियों ne

यह वचन सुनकर ठोकर खाई

 

13 उसने उत्तर दिया हर पौधा jo मेरे स्वर्गीय पिता ने nahi लगाया उखाड़ा जाएगा।

 

14 उनको jane दो वे अंधे मार्ग दिखानेवाले हैं or अंधा यदि अंधे ko

मार्ग दिखाए to दोनों गड्ढे में गिर पड़ेंगे

15 यह सुनकर पतरस ने उससे kaha यह दृष्टान्त हमें समझा दे

 

16 उसने कहा क्या tum भी अब तक नासमझ हो

 

17 क्या tum नहीं समझते ki जो कुछ मुँह में जाता वह पेट में पड़ता है or

शौच से निकल जाता है?

 

18 पर jo कुछ मुँह se निकलता he वह मन से निकलता है or वही मनुष्य ko अशुद्ध करता है

 

19 क्योंकि बुरे विचार हत्या परस्त्रीगमन व्यभिचार chori झूठी गवाही

और निन्दा मन ही se निकलती है

 

20 यही he जो मनुष्य ko अशुद्ध करती हैं परन्तु हाथ बिना धोए

भोजन करना मनुष्य ko अशुद्ध नहीं करता

कनानी जाति की स्त्री का विश्वास

21 यीशु वहाँ se निकलकर सूर और सैदा के देशों की or चला गया

 

22 और देखो उस प्रदेश से ek कनानी स्त्री निकली or चिल्लाकर कहने लगी he

प्रभु दाऊद ke सन्तान मुझ daya दया कर मेरी बेटी ko दुष्टात्मा बहुत सता रहा है।

 

23 पर उसने use कुछ उत्तर न दिया or उसके चेलों ने आकर उससे विनती karke

कहा इसे विदा कर क्योंकि wah हमारे पीछे चिल्लाती आती है।

 

24 उसने उत्तर दिया इस्राएल ke घराने ko खोई हुई भेड़ों को छोड़ me

किसी के पास नहीं भेजा गया।

 

25 पर वह आई और us प्रणाम करके कहने लगी he प्रभु मेरी सहायता कर

 

26 उसने uter दिया लड़कों ki रोटी लेकर कुत्तों के आगे डालना अच्छा नहीं।

 

27 उसने कहा सत्य he प्रभु पर कुत्ते भी वह चूरचार खाते हैं jo

उनके स्वामियों की मेज से गिरते हैं

 

28 इस पर यीशु ने uske उत्तर देकर कहा he स्त्री तेरा विश्वास बड़ा है जैसा तू चाहती है tere

लिये वैसा ही हो और उसकी बेटी उसी समय चंगी ho गई।

अनेक रोगियों को चंगा करना

29 यीशु वहाँ se चलकर गलील ki झील के पास आया or पहाड़ पर चढ़कर वहाँ बैठ गया।

 

30 और भीड़ पर भीड़ uske पास आई we अपने साथ लँगड़ों अंधों गूँगों टुण्डों और बहुतों ko

लेकर उसके पास आए और उन्हें उसके पाँवों पर डाल दिया or उसने उन्हें चंगा किया।

 

31 अत जब लोगों ने देख ki गूंगे बोलते और टुण्डे चंगे

होते or लँगड़े चलते or अंधे देखते हैं तो

अचम्भा करके इस्राएल के परमेश्‍वर की बड़ाई ki।

चार हजार लोगों को खिलाना

32 यीशु ने अपने चेलों ko बुलाकर कहा मुझे इस भीड़ पर तरस आता है क्योंकि we तीन

दिन से मेरे साथ हैं or उनके पास कुछ खाने को नहीं और me उन्हें भूखा विदा करना नहीं

चाहता कहीं ऐसा न ho कि मार्ग में थककर गिर जाएँ।

 

33 चेलों ने उससे कहा हमें esh निर्जन स्थान me कहाँ से इतनी रोटी मिलेगी ki

हम इतनी बड़ी भीड़ को तृप्त करें

 

34 यीशु ne उनसे पूछा तुम्हारे पास कितनी रोटियाँ हैं उन्होंने कहा सात or

थोड़ी सी छोटी मछलियाँ।

 

35 तब उसने लोगों को भूमि पर बैठने ki आज्ञा दी।

 

36 और उन सात रोटियों or मछलियों को ले धन्यवाद करके तोड़ा or

अपने चेलों को देता गया और चेले लोगों को।

 

37 इस प्रकार sub खाकर तृप्त ho गए और बचे हुए टुकड़ों se

भरे हुए सात टोकरे उठाए।

 

38 और खानेवाले स्त्रियों or बालकों ko छोड़ चार हजार पुरुष थे।

 

39 तब वह भीड़ ko विदा करके नाव पर चढ़ गया और मगदन क्षेत्र me आया।

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