परमेश्‍वर का चुना हुआ सेवक,एक पेड़ अपने फल से पहचाना जाता हैं,सूखे हाथ वाला मनुष्य,अशुद्ध आत्मा को घर की तलाश.

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यीशु सब्त का प्रभु

1 उस समय यीशु सब्त ke दिन खेतों में से होकर ja रहा था और उसके चेलों ko भूख लगी or वे बालें तोड़-तोड़ कर खाने लगे।

2 फरीसियों ने यह देखकर उससे कहा देख tere चेले वह काम कर रहे हैं जो सब्त ke दिन करना उचित नहीं।

3 उसने उनसे कहा क्या tum ने नहीं पढ़ा कि दाऊद ने जब वह or उसके साथी भूखे हुए तो क्या किया?

4 वह कैसे परमेश्‍वर के घर में गया or भेंट ki रोटियाँ खाई जिन्हें खाना न तो उसे और न उसके साथियों ko पर केवल याजकों को उचित था?

5 या क्या tum ने व्यवस्था में नहीं पढ़ा कि याजक सब्त ke दिन मन्दिर में सब्त के दिन की विधि ko तोड़ने पर भी निर्दोष ठहरते हैं (गिन. 28:9-10, यूह. 7:22-23)

6 पर मैं तुम से कहता हूँ ki यहाँ वह है, जो मन्दिर se भी महान है।

7 यदि tum इसका अर्थ जानते ki मैं दया से प्रसन्‍न होता हूँ बलिदान से नहीं तो तुम निर्दोष k9 दोषी न ठहराते। (होशे 6:6)

8 मनुष्य का पुत्र तो सब्त ke दिन का भी प्रभु है। (मर. 2:28)

सूखे हाथ वाला मनुष्य

9 वहाँ se चलकर वह उनके आराधनालय में आया।

10 वहाँ ek मनुष्य था जिसका हाथ सूखा हुआ था or उन्होंने उस पर दोष लगाने के लिए उससे पूछा क्या सब्त ke दिन चंगा करना उचित है?

11 उसने उनसे कहा tum में ऐसा कौन है जिसकी एक भेड़ हो or वह सब्त के दिन गड्ढे में गिर जाए to वह उसे पकड़कर न निकाले?

12 भला मनुष्य ka मूल्य भेड़ से कितना बढ़ कर है! इसलिए सब्त ke दिन भलाई करना उचित है।

13 तब उसने us मनुष्य से कहा अपना हाथ बढ़ा। उसने बढ़ाया or वह फिर दूसरे हाथ ke समान अच्छा हो गया।

14 तब फरीसियों ने बाहर जाकर uske विरोध में सम्मति ki कि उसे किस प्रकार मार डाले?

परमेश्‍वर का चुना हुआ सेवक

15 यह जानकर यीशु वहाँ se चला गया। or बहुत लोग उसके पीछे हो लिये और उसने सब ko चंगा किया।

16 और उन्हें चेतावनी दी ki मुझे प्रगट न करना।

17 कि jo वचन यशायाह भविष्यद्वक्ता ke द्वारा कहा गया था वह पूरा हो

18 देखो, यह मेरा सेवक है जिसे मैंने चुना है मेरा प्रिय जिससे mera मन प्रसन्‍न है मैं अपना आत्मा उस पर डालूँगा or वह अन्यजातियों को न्याय ka समाचार देगा।

19 वह न झगड़ा करेगा or न धूम मचाएगा

और न बाजारों me कोई उसका शब्द सुनेगा।

20 वह कुचले हुए सरकण्डे ko न तोड़ेगा;

और धूआँ देती हुई बत्ती ko न बुझाएगा,

जब तक न्याय को प्रबल न कराए।

21 और अन्यजातियाँ uske नाम पर आशा रखेंगी।

यीशु और दुष्टात्माओं के शासक

22 तब लोग एक अंधे-गूँगे ko जिसमें दुष्टात्मा थी उसके पास लाए or उसने उसे अच्छा किया or वह गूँगा बोलने और देखने लगा।

23 इस par सब लोग चकित होकर कहने लगे यह क्या दाऊद ki सन्तान है?

24 परन्तु फरीसियों ne यह सुनकर कहा यह तो दुष्टात्माओं के सरदार शैतान ki सहायता के बिना दुष्टात्माओं ko नहीं निकालता।

25 उसने उनके मन ki बात जानकर उनसे कहा जिस किसी राज्य me फूट होती है वह उजड़ जाता है or कोई नगर या घराना जिसमें फूट होती है बना न रहेगा।

26 और यदि शैतान ही शैतान ko निकाले तो वह apna ही विरोधी हो गया है फिर उसका राज्य कैसे बना रहेगा?

27 भला यदि मैं शैतान ki सहायता से दुष्टात्माओं ko निकालता हूँ तो तुम्हारे वंश किसकी सहायता se निकालते हैं? इसलिए वे ही तुम्हारा न्याय करेंगे।

28 पर यदि मैं परमेश्‍वर ke आत्मा की सहायता से दुष्टात्माओं को निकालता हूँ तो परमेश्‍वर ka राज्य तुम्हारे पास आ पहुँचा है।

29 या कैसे कोई मनुष्य किसी बलवन्त ke घर में घुसकर उसका माल लूट सकता है जब तक ki पहले उस बलवन्त को न बाँध ले? Or तब वह उसका घर लूट लेगा।

30 जो मेरे साथ नहीं वह mere विरोध में है और jo मेरे साथ नहीं बटोरता वह बिखेरता है।

31 इसलिए मैं tum से कहता हूँ कि मनुष्य का सब प्रकार का पाप or निन्दा क्षमा की जाएगी पर पवित्र आत्मा की निन्दा क्षमा न ki जाएगी।

32 जो कोई मनुष्य के पुत्र ke विरोध में कोई बात कहेगा उसका यह अपराध क्षमा किया जाएगा परन्तु jo कोई पवित्र आत्मा ke विरोध में कुछ कहेगा उसका अपराध न to इस लोक में or न ही आनेवाले में क्षमा किया जाएगा।

एक पेड़ अपने फल से पहचाना जाता हैं

33 यदि पेड़ ko अच्छा कहो तो उसके फल को भी अच्छा कहो या पेड़ को निकम्मा कहो तो uske फल को भी निकम्मा कहो क्योंकि पेड़ फल ही se पहचाना जाता है।

34 हे साँप के बच्चों tum बुरे होकर कैसे अच्छी बातें कह सकते हो? क्योंकि jo मन में भरा है वही मुँह पर आता है।

35 भला मनुष्य मन ke भले भण्डार से भली बातें निकालता है or बुरा मनुष्य बुरे भण्डार se बुरी बातें निकालता है।

36 और मैं tum से कहता हूँ ki जो-जो निकम्मी बातें मनुष्य कहेंगे न्याय के दिन हर ek बात का लेखा देंगे।

37 क्योंकि tu अपनी बातों ke कारण निर्दोष or अपनी बातों ही ke कारण दोषी ठहराया जाएगा।

यीशु से चिन्ह की माँग

38 इस पर कुछ शास्त्रियों or फरीसियों ने उससे कहा हे गुरु हम तुझ से ek चिन्ह देखना चाहते हैं।

39 उसने उन्हें उत्तर दिया esh युग के बुरे or व्यभिचारी लोग चिन्ह ढूँढ़ते हैं परन्तु योना भविष्यद्वक्ता ke चिन्ह को छोड़ कोई or चिन्ह उनको न दिया जाएगा।

40 योना तीन रात-दिन महा मच्छ ke पेट में रहा वैसे ही मनुष्य का पुत्र तीन रात-दिन पृथ्वी ke भीतर रहेगा।

41 नीनवे के लोग न्याय ke दिन इस युग के लोगों ke साथ उठकर उन्हें दोषी ठहराएँगे क्योंकि उन्होंने योना का प्रचार सुनकर मन फिराया or यहाँ वह है जो योना se भी बड़ा है।

42 दक्षिण की रानी न्याय ke दिन इस युग के लोगों ke साथ उठकर उन्हें दोषी ठहराएँगी क्योंकि वह सुलैमान ka ज्ञान सुनने ke लिये पृथ्वी की छोर से आई और यहाँ वह है jo सुलैमान से भी बड़ा है।

अशुद्ध आत्मा को घर की तलाश

43 जब अशुद्ध आत्मा मनुष्य में se निकल जाती है तो सूखी जगहों में विश्राम ढूँढ़ती फिरती है or पाती नहीं।

44 तब कहती है कि मैं apne उसी घर में जहाँ से निकली थी लौट जाऊँगी or आकर उसे सूना झाड़ा-बुहारा or सजा-सजाया पाती है।

45 तब वह जाकर अपने se और बुरी सात आत्माओं ko अपने साथ ले आती है or वे उसमें पैठकर वहाँ वास करती है, और us मनुष्य की पिछली दशा पहले se भी बुरी हो जाती है इस युग के बुरे लोगों ki दशा भी ऐसी ही होगी।

यीशु का सच्चा परिवार

46 जब वह भीड़ se बातें कर ही रहा था तो उसकी माता और भाई बाहर खड़े थे or उससे बातें करना चाहते थे।

47 किसी ने उससे कहा देख teri माता और तेरे भाई बाहर खड़े हैं or तुझ से बातें करना चाहते हैं।

48 यह सुन उसने कहनेवाले ko उत्तर दिया kon हैं मेरी माता? और कौन हैं मेरे भाई?

49 और अपने चेलों ki ओर अपना हाथ बढ़ा कर कहा मेरी माता or मेरे भाई ये हैं।

50 क्योंकि jo कोई मेरे स्वर्गीय पिता ki इच्छा पर चले वही मेरा भाई or बहन और माता है।

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