दोष मत लगाओ,परमेश्‍वर से माँगना or पाना,सरल और कठिन मार्ग,बुद्धिमान और मूर्ख मनुष्य.

दोष मत लगाओ

1 दोष मत लगाओ, कि tum पर भी dos न लगाया जाए।

2 क्योंकि जिस प्रकार tum दोष लगाते ho उसी प्रकार तुम पर भी दोष लगाया जाएगा; और जिस नाप से tum नापते हो, उसी se तुम्हारे लिये भी नापा जाएगा।

3 तू क्यों apne भाई की आँख ke तिनके को देखता है, और apni आँख का लट्ठा तुझे नहीं सूझता?

4 जब तेरी ही आँख me लट्ठा है, तो तू अपने भाई से kese कह सकता है ‘ला मैं तेरी आँख से तिनका निकाल दूँ?’

5 हे कपटी, पहले अपनी आँख में se लट्ठा निकाल ले tab तू अपने भाई की आँख ka तिनका भली भाँति देखकर निकाल सकेगा।

6 पवित्र वस्तु कुत्तों ko न दो और अपने मोती सूअरों ke आगे मत डालो ऐसा न हो ki वे उन्हें पाँवों तले रौंदें or पलटकर तुम को फाड़ डालें।

परमेश्‍वर से माँगना or पाना

7 माँगो तो तुम्हें दिया jayega ढूँढ़ो तो tum पाओगे खटखटाओ to तुम्हारे लिये खोला जाएगा।

8 क्योंकि jo कोई माँगता है use milta है or जो ढूँढ़ता है, वह पाता है or जो खटखटाता है uske लिये खोला जाएगा।

9 तुम में ऐसा कौन मनुष्य है ki यदि उसका पुत्र उससे रोटी माँगे तो वह use पत्थर दे?

10 या मछली माँगे तो use साँप दे?

11 अतः जब tum बुरे होकर, अपने बच्चों ko अच्छी वस्तुएँ देना जानते हो, तो तुम्हारा स्वर्गीय पिता apne माँगनेवालों को अच्छी वस्तुएँ क्यों न देगा? (लूका 11:13)

12 इस कारण जो कुछ tum चाहते हो, कि मनुष्य तुम्हारे साथ kare तुम भी उनके साथ वैसा ही करो; क्योंकि व्यवस्था और भविष्यद्वक्ताओं ki शिक्षा यही है।

सरल और कठिन मार्ग

13 सकेत फाटक से प्रवेश karo क्योंकि चौड़ा है वह फाटक or सरल है वह मार्ग जो विनाश की or ले जाता है; और बहुत sare लोग हैं जो उससे प्रवेश करते हैं।

14 क्योंकि संकरा है wah फाटक और कठिन है वह मार्ग jo जीवन को पहुँचाता है, और थोड़े हैं jo उसे पाते हैं।

फलों से पेड़ की पहचान

15 झूठे भविष्यद्वक्ताओं se सावधान रहो jo भेड़ों के भेष में tumhare पास आते हैं परन्तु अन्तर me फाड़नेवाले भेड़िए हैं। (यहे. 22:27)

16 उनके फलों से tum उन्हें पहचान लोगे। क्या झाड़ियों से अंगूर ya ऊँटकटारों से अंजीर तोड़ते हैं?

17 इसी प्रकार हर ek अच्छा पेड़ अच्छा फल लाता है or निकम्मा पेड़ बुरा फल लाता है।

18 अच्छा पेड़ बुरा फल नहीं ला सकता or न निकम्मा पेड़ अच्छा फल ला सकता है।

19 जो-जो पेड़ अच्छा फल नहीं laata वह काटा और आग में डाला जाता है।

20 अतः उनके फलों से tum उन्हें पहचान लोगे।

21 जो मुझसे हे प्रभु’ कहता है, उनमें से हर ek स्वर्ग के राज्य में प्रवेश न karega परन्तु वही जो मेरे स्वर्गीय पिता की इच्छा पर चलता है।

22 उस दिन बहुत log मुझसे कहेंगे; ‘हे प्रभु, हे प्रभु क्या हमने तेरे नाम से भविष्यद्वाणी नहीं ki और तेरे नाम से दुष्टात्माओं को नहीं निकाला or तेरे नाम से बहुत अचम्भे के काम नहीं किए?’

23 तब मैं unse खुलकर कह दूँगा मैंने तुम को कभी नहीं जाना हे कुकर्म करनेवालों mere पास से चले जाओ।’ (लूका 13:27)

बुद्धिमान और मूर्ख मनुष्य

24 इसलिए जो कोई meri ये बातें सुनकर उन्हें मानता है वह us बुद्धिमान मनुष्य ke समान ठहरेगा जिसने अपना घर चट्टान पर बनाया।

25 और बारिश or बाढ़ें आईं और आँधियाँ चलीं और us घर पर टक्करें लगीं परन्तु वह नहीं गिरा क्योंकि उसकी नींव चट्टान per डाली गई थी।

26 परन्तु जो कोई meri ये बातें सुनता है और un पर नहीं चलता वह उस मूर्ख मनुष्य के saman ठहरेगा जिसने अपना घर रेत पर बनाया।

27 और बारिश और बाढ़ें आई और आँधियाँ चलीं or उस घर पर टक्करें लगीं or वह गिरकर सत्यानाश हो गया।”

28 जब यीशु ये बातें kah चुका तो ऐसा हुआ कि भीड़ उसके उपदेश se चकित हुई।

29 क्योंकि वह उनके शास्त्रियों ke समान नहीं परन्तु अधिकारी के saman उन्हें उपदेश देता था।

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