धरती पर नेफिलीम

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धरती पर नेफिलीम

सोचिए, आप कहीं जा रहे हैं कि अचानक आपके सामने एक लंबा-चौड़ा आदमी आ जाता है। ऐसे में क्या आप डर नहीं जाएँगे? आज से हज़ारों साल पहले इस धरती पर ऐसे ही लंबे-चौड़े लोग रहा करते थे। वे इतने लंबे होते थे कि अगर आपके घर के अंदर खड़े हो जाते, तो उनका सिर छत से लग जाता। आखिर ये लोग थे कौन? बाइबल इन्हें नेफिलीम कहती है और ये स्वर्गदूतों के बच्चे थे। स्वर्गदूतों के बच्चे, यह कैसे हो सकता है?

क्या आपको वह बुरा स्वर्गदूत शैतान याद है, जो लोगों को बिगाड़ने पर तुला हुआ था? वह सिर्फ लोगों को ही नहीं, परमेश्वर के अच्छे स्वर्गदूतों को भी बिगाड़ने की कोशिश कर रहा था। अफसोस, कुछ स्वर्गदूत उसकी बातों में आ गए। उन स्वर्गदूतों ने वह काम करना बंद कर दिया, जो परमेश्वर ने उन्हें स्वर्ग में दिया था। क्यों? क्योंकि उन्होंने धरती पर सुंदर-सुंदर औरतों को देखा और वे उनके साथ रहना चाहते थे। फिर क्या था, वे इंसान बनकर धरती पर आए और अपनी-अपनी पसंद की औरतों से शादी कर ली। बाइबल कहती है कि ऐसा करना गलत था, क्योंकि परमेश्वर ने स्वर्गदूतों को स्वर्ग में रहने के लिए बनाया था, ना कि धरती पर।

आगे चलकर इन औरतों के बच्चे हुए। पहले तो ये बच्चे एकदम दूसरे बच्चों की तरह दिखते थे। मगर एक बार जब वे बढ़ने लगे, तो वे बड़े, बड़े, और बड़े होते गए। वे इतने बड़े हो गए कि बाकी सब लोगों से ज़्यादा लंबे और ताकतवर बन गए। इन्हीं को नेफिलीम कहा जाता था।

नेफिलीम बहुत बुरे लोग थे। बड़े और ताकतवर होने की वजह से वे अपने से छोटे लोगों को मारते थे और उनकी चीज़ें छीन लेते थे। वे सभी को ज़बरदस्ती अपने जैसा बुरा बनाना चाहते थे।

क्या हनोक के मरने के बाद धरती पर एक भी अच्छा इंसान नहीं रह गया था? ऐसी बात नहीं है। धरती पर एक अच्छा आदमी था और उसका नाम था, नूह। नूह हमेशा वही करता था, जो परमेश्वर उसे करने के लिए कहता था।

एक दिन परमेश्वर ने नूह से कहा कि वह जल्द ही सब बुरे लोगों का नाश करेगा। लेकिन परमेश्वर नूह, उसके परिवार और कई जानवरों को बचानेवाला था। क्या आप जानना चाहेंगे कैसे? तो आइए अगली कहानी पढ़ें।

उत्पत्ति 6:1-8; यहूदा 6.

उत्पत्ति 6:1-8
[1]फिर जब मनुष्य भूमि के ऊपर बहुत बढ़ने लगे, और उनके बेटियां उत्पन्न हुई,
[2]तब परमेश्वर के पुत्रों ने मनुष्य की पुत्रियों को देखा, कि वे सुन्दर हैं; सो उन्होंने जिस जिस को चाहा उन से ब्याह कर लिया।
[3]और यहोवा ने कहा, मेरा आत्मा मनुष्य से सदा लों विवाद करता न रहेगा, क्योंकि मनुष्य भी शरीर ही है: उसकी आयु एक सौ बीस वर्ष की होगी।
[4]उन दिनों में पृथ्वी पर दानव रहते थे; और इसके पश्चात जब परमेश्वर के पुत्र मनुष्य की पुत्रियों के पास गए तब उनके द्वारा जो सन्तान उत्पन्न हुए, वे पुत्र शूरवीर होते थे, जिनकी कीर्ति प्राचीन काल से प्रचलित है।
[5]और यहोवा ने देखा, कि मनुष्यों की बुराई पृथ्वी पर बढ़ गई है, और उनके मन के विचार में जो कुछ उत्पन्न होता है सो निरन्तर बुरा ही होता है।
[6]और यहोवा पृथ्वी पर मनुष्य को बनाने से पछताया, और वह मन में अति खेदित हुआ।
[7]तब यहोवा ने सोचा, कि मैं मनुष्य को जिसकी मैं ने सृष्टि की है पृथ्वी के ऊपर से मिटा दूंगा; क्या मनुष्य, क्या पशु, क्या रेंगने वाले जन्तु, क्या आकाश के पक्षी, सब को मिटा दूंगा क्योंकि मैं उनके बनाने से पछताता हूं।
[8]परन्तु यहोवा के अनुग्रह की दृष्टि नूह पर बनी रही॥
यहूदा 1:6
[6]फिर जो र्स्वगदूतों ने अपने पद को स्थिर न रखा वरन अपने निज निवास को छोड़ दिया, उस ने उन को भी उस भीषण दिन के न्याय के लिये अन्धकार में जो सदा काल के लिये है बन्धनों में रखा है।

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