एक बहादुर आदमी

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एक बहादुर आदमी

धरती पर धीरे-धीरे लोगों की गिनती बढ़ने लगी। मगर उनमें से बहुत-से लोग कैन की तरह बुरे काम करते थे। पर एक आदमी उन सबसे अलग था। उसका नाम था, हनोक। हनोक एक बहादुर आदमी था और कोई बुरा काम नहीं करता था। वह परमेश्वर का कहना मानता था।

क्या आपको मालूम है, उस समय के लोग इतने बुरे काम क्यों करते थे? याद है, किसने आदम और हव्वा से परमेश्वर की बात न मानने के लिए कहा था? किसने उन्हें वह फल खाने के लिए कहा था, जिसे खाने से परमेश्वर ने मना किया था? जी हाँ, वह कोई और नहीं, एक बुरा स्वर्गदूत था। बाइबल में उसे शैतान कहा गया है। वह सबको अपने जैसा बुरा बनाना चाहता है।

एक दिन यहोवा परमेश्वर ने हनोक से कहा कि वह सब लोगों को एक बात बताए। वह बात शायद किसी को भी पसंद न आती। जानते हैं वह बात क्या थी? वह यह कि ‘परमेश्वर सब बुरे लोगों का नाश करनेवाला है।’ यह बात सुनकर लोगों का चेहरा ज़रूर गुस्से से लाल हो गया होगा। उन्होंने शायद हनोक को मार डालने की भी कोशिश की होगी। सोचिए, ऐसे में लोगों को परमेश्वर की बात बताने के लिए हनोक को कितनी बहादुरी से काम लेना पड़ा होगा।

परमेश्वर ने हनोक को उन बुरे लोगों के बीच ज़्यादा दिन नहीं रहने दिया। हनोक सिर्फ 365 साल ज़िंदा रहा। हम क्यों “सिर्फ 365 साल” कह रहे हैं? क्योंकि उस समय के लोग आज के लोगों से ज़्यादा ताकतवर होते थे और उनकी उम्र बहुत लंबी होती थी। जैसे, कुछ लोग 800 या 900 साल तक ज़िंदा रहते थे। हनोक का बेटा, मतूशेलह तो 969 साल तक जीया!

हनोक के मरने के बाद, लोग और भी बुरे-बुरे काम करने लगे। बाइबल कहती है कि ‘वे हमेशा बुरी बात ही सोचते थे’ और ‘धरती पर चारों तरफ मार-काट मची हुई थी।’

पता है इस कदर बुराई बढ़ने की एक वजह क्या थी? वह यह कि शैतान लोगों को एक नए तरीके से बुरे काम करने के लिए बहका रहा था। इस बारे में हम अगली कहानी में देखेंगे।

उत्पत्ति 5:21-24, 27; 6:​5, 11-13; इब्रानियों 11:5; यहूदा 14, 15.

उत्पत्ति 5:21-24,27
[21]जब हनोक पैंसठ वर्ष का हुआ, तब उसने मतूशेलह को जन्म दिया।
[22]और मतूशेलह के जन्म के पश्चात हनोक तीन सौ वर्ष तक परमेश्वर के साथ साथ चलता रहा, और उसके और भी बेटे बेटियां उत्पन्न हुईं।
[23]और हनोक की कुल अवस्था तीन सौ पैंसठ वर्ष की हुई।
[24]और हनोक परमेश्वर के साथ साथ चलता था; फिर वह लोप हो गया क्योंकि परमेश्वर ने उसे उठा लिया।
[27]और मतूशेलह की कुल अवस्था नौ सौ उनहत्तर वर्ष की हुई: तत्पश्चात वह मर गया॥
उत्पत्ति 6:5,11,13
[5]और यहोवा ने देखा, कि मनुष्यों की बुराई पृथ्वी पर बढ़ गई है, और उनके मन के विचार में जो कुछ उत्पन्न होता है सो निरन्तर बुरा ही होता है।
[11]उस समय पृथ्वी परमेश्वर की दृष्टि में बिगड़ गई थी, और उपद्रव से भर गई थी।
[13]तब परमेश्वर ने नूह से कहा, सब प्राणियों के अन्त करने का प्रश्न मेरे साम्हने आ गया है; क्योंकि उनके कारण पृथ्वी उपद्रव से भर गई है, इसलिये मैं उन को पृथ्वी समेत नाश कर डालूंगा।
इब्रानियों 11:5
[5]विश्वास ही से हनोक उठा लिया गया, कि मृत्यु को न देखे, और उसका पता नहीं मिला; क्योंकि परमेश्वर ने उसे उठा लिया था, और उसके उठाए जाने से पहिले उस की यह गवाही दी गई थी, कि उस ने परमेश्वर को प्रसन्न किया है।
यहूदा 1:14-15
[14]और हनोक ने भी जो आदम से सातवीं पीढ़ी में था, इन के विषय में यह भविष्यद्ववाणी की, कि देखो, प्रभु अपने लाखों पवित्रों के साथ आया।
[15]कि सब का न्याय करे, और सब भक्तिहीनों को उन के अभक्ति के सब कामों के विषय में, जो उन्होंने भक्तिहीन होकर किये हैं, और उन सब कठोर बातों के विषय में जो भक्तिहीन पापियों ने उसके विरोध में कही हैं, दोषी ठहराए।

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