मुश्किल ज़िंदगी की शुरूआत

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मुश्किल ज़िंदगी की शुरूआत

अदन बगीचे के बाहर आदम और हव्वा को बहुत-सी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। पहली बात, अब उन्हें खाना आसानी से नहीं मिलता था। इसके लिए उन्हें बड़ी मेहनत करनी पड़ती थी। क्योंकि वहाँ मीठे-रसीले फलों के पेड़ नहीं थे। इसके बजाय, चारों तरफ सिर्फ काँटेदार झाड़ियाँ थीं। आदम और हव्वा पर ये सारी मुसीबतें इसलिए आयीं, क्योंकि उन्होंने परमेश्वर की बात नहीं मानी और उससे दोस्ती तोड़ दी।

लेकन उससे भी बुरा यह हुआ कि अब आदम और हव्वा हमेशा तक नहीं जी पाते। याद है, परमेश्वर ने उन्हें पहले ही बता दिया था कि अगर वे उस पेड़ का फल खाएँगे तो मर जाएँगे। उनके साथ वही हुआ। जिस दिन से उन्होंने वह फल खाया उस दिन से वे बूढ़े होने लगे और आखिर में मर गए। सच, परमेश्वर की बात न मानकर उन्होंने कितनी बड़ी भूल की!

जब आदम और हव्वा को अदन बगीचे से बाहर निकाल दिया गया, उसके बाद ही उनके बच्चे पैदा हुए। इसका मतलब यह हुआ कि अब उनके बच्चों को भी बूढ़ा होना और मरना पड़ेगा।

काश! आदम और हव्वा ने यहोवा का कहा माना होता। तब वे और उनके बच्चे सुख से रहते। इतना ही नहीं, वे सब आज भी ज़िंदा होते और हमेशा तक खुशी-खुशी जीते। फिर न तो कोई बीमार होता और न बूढ़ा। यहाँ तक कि कोई मरता भी नहीं।

परमेश्वर चाहता है कि सब लोग खुशी से रहें। वह वादा करता है कि एक दिन ऐसा ज़रूर होगा। तब न सिर्फ पूरी धरती खूबसूरत बन जाएगी, बल्कि सभी इंसानों की सेहत भी अच्छी हो जाएगी। और सब एक-दूसरे के अच्छे दोस्त बन जाएँगे। साथ ही, परमेश्वर के संग भी उनकी दोस्ती हो जाएगी।

मगर परमेश्वर का कहना न मानने की वजह से हव्वा की उसके साथ दोस्ती टूट गयी। इसलिए जब उसने बच्चों को जन्म दिया, तो परमेश्वर ने उसकी मदद नहीं की। इस वजह से उसे बहुत दर्द हुआ। देखा, परमेश्वर की बात न मानने से क्या हुआ।

आदम और हव्वा के कई बेटे और बेटियाँ हुईं। उन्होंने अपने पहले बेटे का नाम, कैन रखा और दूसरे का हाबिल। क्या आप जानना चाहेंगे कि कैन और हाबिल के साथ क्या हुआ?

उत्पत्ति 3:​16-23; 4:​1, 2; प्रकाशितवाक्य 21:​3, 4.

उत्पत्ति 3:16-23
[16]फिर स्त्री से उसने कहा, मैं तेरी पीड़ा और तेरे गर्भवती होने के दु:ख को बहुत बढ़ाऊंगा; तू पीड़ित हो कर बालक उत्पन्न करेगी; और तेरी लालसा तेरे पति की ओर होगी, और वह तुझ पर प्रभुता करेगा।
[17]और आदम से उसने कहा, तू ने जो अपनी पत्नी की बात सुनी, और जिस वृक्ष के फल के विषय मैं ने तुझे आज्ञा दी थी कि तू उसे न खाना उसको तू ने खाया है, इसलिये भूमि तेरे कारण शापित है: तू उसकी उपज जीवन भर दु:ख के साथ खाया करेगा:
[18]और वह तेरे लिये कांटे और ऊंटकटारे उगाएगी, और तू खेत की उपज खाएगा ;
[19]और अपने माथे के पसीने की रोटी खाया करेगा, और अन्त में मिट्टी में मिल जाएगा; क्योंकि तू उसी में से निकाला गया है, तू मिट्टी तो है और मिट्टी ही में फिर मिल जाएगा।
[20]और आदम ने अपनी पत्नी का नाम हव्वा रखा; क्योंकि जितने मनुष्य जीवित हैं उन सब की आदिमाता वही हुई।
[21]और यहोवा परमेश्वर ने आदम और उसकी पत्नी के लिये चमड़े के अंगरखे बना कर उन को पहिना दिए।
[22]फिर यहोवा परमेश्वर ने कहा, मनुष्य भले बुरे का ज्ञान पाकर हम में से एक के समान हो गया है: इसलिये अब ऐसा न हो, कि वह हाथ बढ़ा कर जीवन के वृक्ष का फल भी तोड़ के खा ले और सदा जीवित रहे।
[23]तब यहोवा परमेश्वर ने उसको अदन की बाटिका में से निकाल दिया कि वह उस भूमि पर खेती करे जिस में से वह बनाया गया था।

प्रकाशित वाक्य 21:3-4
[3]फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊंचे शब्द से यह कहते सुना, कि देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है; वह उन के साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उन के साथ रहेगा; और उन का परमेश्वर होगा।
[4]और वह उन की आंखोंसे सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं।

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