उन्हें अदन बगीचे से बाहर क्यों निकाल दिया गया

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उन्हें अदन बगीचे से बाहर क्यों निकाल दिया गया

अरे, यह क्या हो रहा है? आदम और हव्वा को अदन बगीचे से बाहर निकाला जा रहा है। पर क्यों?

वह इसलिए, क्योंकि उन्होंने एक गलत काम किया। और इस वजह से यहोवा उन्हें सज़ा दे रहा है। क्या आपको मालूम है, आदम और हव्वा ने क्या गलत काम किया?

बात यह थी कि परमेश्वर ने उनसे कहा कि वे अदन बगीचे के सभी पेड़ों से फल तोड़कर खा सकते हैं। लेकिन परमेश्वर ने उन्हें एक पेड़ का फल खाने से मना किया था। परमेश्वर ने यह भी कहा कि अगर वे उस पेड़ का फल खाएँगे, तो वे मर जाएँगे। और जैसा कि आप जानते हैं, जिस चीज़ को लेने से हमें मना किया जाता है, उसे लेना गलत है। तो क्या आदम और हव्वा ने परमेश्वर की बात मानी? चलिए देखते हैं।

एक दिन हव्वा बगीचे में अकेली थी। तभी एक साँप आकर उससे बात करने लगा। पता है उसने हव्वा से क्या कहा? उसने हव्वा से कहा कि वह उस पेड़ का फल खा ले, जिसके लिए परमेश्वर ने मना किया था। यह बड़ी अजीब बात थी। परमेश्वर ने तो साँपों को इस तरह बनाया ही नहीं था कि वे बात कर सकें। फिर तो इसका एक ही मतलब हो सकता है, साँप के बोलने के पीछे किसी और का हाथ था। किसका?

वह आदम नहीं था। तो फिर वह कौन था? यह उन्हीं में से कोई एक होगा जिन्हें परमेश्वर ने धरती बनाने से बहुत पहले बनाया था। हमने पढ़ा था ना, वे स्वर्गदूत हैं और हम उन्हें देख नहीं सकते। उन स्वर्गदूतों में से एक बहुत घमंडी बन गया। इतना घमंडी कि वह परमेश्वर की तरह राजा बनने के सपने देखने लगा। वह चाहता था कि इंसान यहोवा की नहीं, बल्कि उसकी बात मानें। यही घमंडी स्वर्गदूत, साँप के ज़रिए बोल रहा था।

उस स्वर्गदूत ने हव्वा को बेवकूफ बनाया। उसने हव्वा से कहा कि अगर वह उस पेड़ का फल खा ले, जिसके लिए परमेश्वर ने मना किया है, तो वह परमेश्वर के जितनी अक्लमंद बन जाएगी। हव्वा ने उसकी बात सच मान ली और वह फल खा लिया। फिर उसने वह फल आदम को दिया और आदम ने भी वह फल खा लिया। उन दोनों ने परमेश्वर का कहा नहीं माना। इसलिए उन्हें अपने घर से, यानी उस खूबसूरत अदन बगीचे से बाहर निकाल दिया गया।

लेकिन एक दिन परमेश्वर ज़रूर पूरी धरती को अदन बगीचे जैसा खूबसूरत बनाएगा। इस काम में आप भी हाथ बँटा सकते हैं। कैसे? यह हम बाद में देखेंगे। आइए पहले हम यह देखें कि आदम और हव्वा को अदन बगीचे से बाहर निकाल देने के बाद उनका क्या हुआ।

उत्पत्ति 2:​16, 17; 3:​1-13, 24; प्रकाशितवाक्य 12:​9.

उत्पत्ति 2:16-17
[16]तब यहोवा परमेश्वर ने आदम को यह आज्ञा दी, कि तू वाटिका के सब वृक्षों का फल बिना खटके खा सकता है:
[17]पर भले या बुरे के ज्ञान का जो वृक्ष है, उसका फल तू कभी न खाना: क्योंकि जिस दिन तू उसका फल खाए उसी दिन अवश्य मर जाएगा॥

उत्पत्ति 3:1-13,24
[1]यहोवा परमेश्वर ने जितने बनैले पशु बनाए थे, उन सब में सर्प धूर्त था, और उसने स्त्री से कहा, क्या सच है, कि परमेश्वर ने कहा, कि तुम इस बाटिका के किसी वृक्ष का फल न खाना?
[2]स्त्री ने सर्प से कहा, इस बाटिका के वृक्षों के फल हम खा सकते हैं।
[3]पर जो वृक्ष बाटिका के बीच में है, उसके फल के विषय में परमेश्वर ने कहा है कि न तो तुम उसको खाना और न उसको छूना, नहीं तो मर जाओगे।
[4]तब सर्प ने स्त्री से कहा, तुम निश्चय न मरोगे,
[5]वरन परमेश्वर आप जानता है, कि जिस दिन तुम उसका फल खाओगे उसी दिन तुम्हारी आंखें खुल जाएंगी, और तुम भले बुरे का ज्ञान पाकर परमेश्वर के तुल्य हो जाओगे।
[6]सो जब स्त्री ने देखा कि उस वृक्ष का फल खाने में अच्छा, और देखने में मनभाऊ, और बुद्धि देने के लिये चाहने योग्य भी है, तब उसने उस में से तोड़कर खाया; और अपने पति को भी दिया, और उसने भी खाया।
[7]तब उन दोनों की आंखे खुल गई, और उन को मालूम हुआ कि वे नंगे है; सो उन्होंने अंजीर के पत्ते जोड़ जोड़ कर लंगोट बना लिये।
[8]तब यहोवा परमेश्वर जो दिन के ठंडे समय बाटिका में फिरता था उसका शब्द उन को सुनाई दिया। तब आदम और उसकी पत्नी बाटिका के वृक्षों के बीच यहोवा परमेश्वर से छिप गए।
[9]तब यहोवा परमेश्वर ने पुकार कर आदम से पूछा, तू कहां है?
[10]उसने कहा, मैं तेरा शब्द बारी में सुन कर डर गया क्योंकि मैं नंगा था; इसलिये छिप गया।
[11]उसने कहा, किस ने तुझे चिताया कि तू नंगा है? जिस वृक्ष का फल खाने को मैं ने तुझे बर्जा था, क्या तू ने उसका फल खाया है?
[12]आदम ने कहा जिस स्त्री को तू ने मेरे संग रहने को दिया है उसी ने उस वृक्ष का फल मुझे दिया, और मैं ने खाया।
[13]तब यहोवा परमेश्वर ने स्त्री से कहा, तू ने यह क्या किया है? स्त्री ने कहा, सर्प ने मुझे बहका दिया तब मैं ने खाया।
[24]इसलिये आदम को उसने निकाल दिया और जीवन के वृक्ष के मार्ग का पहरा देने के लिये अदन की बाटिका के पूर्व की ओर करुबों को, और चारों ओर घूमने वाली ज्वालामय तलवार को भी नियुक्त कर दिया॥

प्रकाशित वाक्य 12:9
[9]और वह बड़ा अजगर अर्थात वही पुराना सांप, जो इब्लीस और शैतान कहलाता है, और सारे संसार का भरमाने वाला है, पृथ्वी पर गिरा दिया गया; और उसके दूत उसके साथ गिरा दिए गए।

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