पहला आदमी और औरत

jesusfilm

पहला आदमी और औरत

इस तसवीर में ऐसा क्या दिखायी दे रहा है, जो पिछली तसवीर में नहीं था? जी हाँ, इसमें इंसान दिखायी दे रहे हैं। ये पहला आदमी और पहली औरत है। आदमी का नाम आदम है और औरत का नाम, हव्वा। आदम और हव्वा को किसने बनाया? परमेश्वर ने। मगर क्या आपको परमेश्वर का नाम मालूम है? उसका नाम है, यहोवा।

सोचिए, यहोवा परमेश्वर ने आदम को कैसे बनाया होगा? उसने ज़मीन से थोड़ी मिट्टी ली, फिर उससे एक इंसान का शरीर बनाया। उस शरीर में कोई कमी नहीं थी। तब परमेश्वर ने उसकी नाक में साँस फूँकी और आदम ज़िंदा हो गया।

इसके बाद, यहोवा परमेश्वर ने आदम को एक काम दिया। उसने आदम से कहा कि वह सब जानवरों के नाम रखे। आदम शायद उन्हें बड़ी देर तक देखता रहा होगा, ताकि वह उनमें से हरेक को कोई अच्छा-सा नाम दे सके। जब आदम जानवरों के नाम रख रहा था, तो उसने कुछ देखा। पता है क्या?

उसने देखा कि सब जानवरों के साथी थे। वहाँ पापा हाथी और मम्मी हाथी थे, पापा शेर और मम्मी शेर थे। मगर आदम का कोई साथी नहीं था। तब मालूम है यहोवा ने क्या किया? उसने आदम को गहरी नींद में सुला दिया। फिर उसकी पसली की एक हड्डी निकाली और उससे आदम के लिए एक औरत बनायी। वह औरत, हव्वा आदम की बीवी बनी।

अब आदम बहुत खुश था! सोचिए जब हव्वा ने इतना खूबसूरत अदन बगीचा देखा होगा, तब वह कितनी खुश हुई होगी! अब वे दोनों हँसी-खुशी एक साथ रह सकते थे और बच्चे पैदा कर सकते थे।

यहोवा चाहता था कि आदम और हव्वा हमेशा ज़िंदा रहें। वह चाहता था कि वे पूरी धरती को अदन बगीचे की तरह खूबसूरत बनाएँ। जब आदम और हव्वा ने ऐसा करने की सोची होगी, तो वे कितने खुश हुए होंगे! अगर आपको इस काम में मदद देने के लिए कहा जाता, तो आपको कैसा लगता? क्या आपको खुशी नहीं होती? आदम और हव्वा ने परमेश्वर का दिया काम शुरू तो किया, लेकिन वे ज़्यादा दिन तक खुश नहीं रहे। आइए पता लगाते हैं कि ऐसा क्यों हुआ।

भजन संहिता 83:18
[18]जिस से यह जानें कि केवल तू जिसका नाम यहोवा है, सारी पृथ्वी के ऊपर परमप्रधान है॥

उत्पत्ति 1:26-31
[26]फिर परमेश्वर ने कहा, हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाएं; और वे समुद्र की मछलियों, और आकाश के पक्षियों, और घरेलू पशुओं, और सारी पृथ्वी पर, और सब रेंगने वाले जन्तुओं पर जो पृथ्वी पर रेंगते हैं, अधिकार रखें।
[27]तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन्न किया, नर और नारी करके उसने मनुष्यों की सृष्टि की।
[28]और परमेश्वर ने उन को आशीष दी: और उन से कहा, फूलो-फलो, और पृथ्वी में भर जाओ, और उसको अपने वश में कर लो; और समुद्र की मछलियों, तथा आकाश के पक्षियों, और पृथ्वी पर रेंगने वाले सब जन्तुओ पर अधिकार रखो।
[29]फिर परमेश्वर ने उन से कहा, सुनो, जितने बीज वाले छोटे छोटे पेड़ सारी पृथ्वी के ऊपर हैं और जितने वृक्षों में बीज वाले फल होते हैं, वे सब मैं ने तुम को दिए हैं; वे तुम्हारे भोजन के लिये हैं:
[30]और जितने पृथ्वी के पशु, और आकाश के पक्षी, और पृथ्वी पर रेंगने वाले जन्तु हैं, जिन में जीवन के प्राण हैं, उन सब के खाने के लिये मैं ने सब हरे हरे छोटे पेड़ दिए हैं; और वैसा ही हो गया।
[31]तब परमेश्वर ने जो कुछ बनाया था, सब को देखा, तो क्या देखा, कि वह बहुत ही अच्छा है। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार छठवां दिन हो गया॥

उत्पत्ति 2:7-25
[7]और यहोवा परमेश्वर ने आदम को भूमि की मिट्टी से रचा और उसके नथनों में जीवन का श्वास फूंक दिया; और आदम जीवता प्राणी बन गया।
[8]और यहोवा परमेश्वर ने पूर्व की ओर अदन देश में एक वाटिका लगाई; और वहां आदम को जिसे उसने रचा था, रख दिया।
[9]और यहोवा परमेश्वर ने भूमि से सब भांति के वृक्ष, जो देखने में मनोहर और जिनके फल खाने में अच्छे हैं उगाए, और वाटिका के बीच में जीवन के वृक्ष को और भले या बुरे के ज्ञान के वृक्ष को भी लगाया।
[10]और उस वाटिका को सींचने के लिये एक महानदी अदन से निकली और वहां से आगे बहकर चार धारा में हो गई।
[11]पहिली धारा का नाम पीशोन है, यह वही है जो हवीला नाम के सारे देश को जहां सोना मिलता है घेरे हुए है।
[12]उस देश का सोना चोखा होता है, वहां मोती और सुलैमानी पत्थर भी मिलते हैं।
[13]और दूसरी नदी का नाम गीहोन है, यह वही है जो कूश के सारे देश को घेरे हुए है।
[14]और तीसरी नदी का नाम हिद्देकेल है, यह वही है जो अश्शूर के पूर्व की ओर बहती है। और चौथी नदी का नाम फरात है।
[15]तब यहोवा परमेश्वर ने आदम को ले कर अदन की वाटिका में रख दिया, कि वह उस में काम करे और उसकी रक्षा करे,
[16]तब यहोवा परमेश्वर ने आदम को यह आज्ञा दी, कि तू वाटिका के सब वृक्षों का फल बिना खटके खा सकता है:
[17]पर भले या बुरे के ज्ञान का जो वृक्ष है, उसका फल तू कभी न खाना: क्योंकि जिस दिन तू उसका फल खाए उसी दिन अवश्य मर जाएगा॥
[18]फिर यहोवा परमेश्वर ने कहा, आदम का अकेला रहना अच्छा नहीं; मैं उसके लिये एक ऐसा सहायक बनाऊंगा जो उससे मेल खाए।
[19]और यहोवा परमेश्वर भूमि में से सब जाति के बनैले पशुओं, और आकाश के सब भाँति के पक्षियों को रचकर आदम के पास ले आया कि देखें, कि वह उनका क्या क्या नाम रखता है; और जिस जिस जीवित प्राणी का जो जो नाम आदम ने रखा वही उसका नाम हो गया।
[20]सो आदम ने सब जाति के घरेलू पशुओं, और आकाश के पक्षियों, और सब जाति के बनैले पशुओं के नाम रखे; परन्तु आदम के लिये कोई ऐसा सहायक न मिला जो उससे मेल खा सके।
[21]तब यहोवा परमेश्वर ने आदम को भारी नीन्द में डाल दिया, और जब वह सो गया तब उसने उसकी एक पसली निकाल कर उसकी सन्ती मांस भर दिया।
[22]और यहोवा परमेश्वर ने उस पसली को जो उसने आदम में से निकाली थी, स्त्री बना दिया; और उसको आदम के पास ले आया।
[23]और आदम ने कहा अब यह मेरी हड्डियों में की हड्डी और मेरे मांस में का मांस है: सो इसका नाम नारी होगा, क्योंकि यह नर में से निकाली गई है।
[24]इस कारण पुरूष अपने माता पिता को छोड़कर अपनी पत्नी से मिला रहेगा और वे एक तन बने रहेंगे।
[25]और आदम और उसकी पत्नी दोनो नंगे थे, पर लजाते न थे॥

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

उन्हें अदन बगीचे से बाहर क्यों निकाल दिया गया

उन्हें अदन बगीचे से बाहर क्यों निकाल दिया गया अरे, यह क्या हो रहा है? आदम और हव्वा को अदन बगीचे से बाहर निकाला जा रहा है। पर क्यों? वह इसलिए, क्योंकि उन्होंने एक गलत काम किया। और इस वजह से यहोवा उन्हें सज़ा दे रहा है। क्या आपको मालूम […]