एक खूबसूरत बगीचा

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एक खूबसूरत बगीचा

ज़रा इस तसवीर को तो देखिए। हरे-भरे पेड़, रंग-बिरंगे फूल, तरह-तरह के जानवर—सबकुछ कितना सुंदर है, है ना? क्या आप बता सकते हैं कि इसमें हाथी और शेर कहाँ हैं?

आखिर यह खूबसूरत बगीचा किसने बनाया? परमेश्वर ने। चलिए देखें कि परमेश्वर ने इस धरती को हमारे रहने लायक बनाने के लिए क्या-क्या किया।

सबसे पहले, परमेश्वर ने हरी-हरी घास बनायी जिससे पूरी ज़मीन ढक गयी। फिर उसने सब तरह के छोटे-छोटे पौधे, झाड़ियाँ और पेड़ बनाए। ये पेड़-पौधे धीरे-धीरे बढ़ने लगे, जिससे सारी धरती खूबसूरत दिखने लगी। इनमें से बहुत-से पेड़-पौधे हमें खाने के लिए अच्छी-अच्छी चीज़ें देते हैं।

उसके बाद परमेश्वर ने मछलियाँ बनायीं, जो पानी में तैरती हैं और चिड़ियाँ बनायीं, जो आसमान में उड़ती हैं। उसने कुत्ते, बिल्ली, घोड़े, सब तरह के छोटे-बड़े जानवर भी बनाए। आपके घर के आस-पास कौन-से जानवर रहते हैं? जब परमेश्वर ने हमारे लिए इतनी सारी चीज़ें बनायी हैं, तो क्या हमें खुश नहीं होना चाहिए?

आखिर में परमेश्वर ने धरती के एक हिस्से को सबसे ज़्यादा खूबसूरत बनाया। उसमें एक-एक चीज़ सुंदर थी। परमेश्वर ने उस जगह का नाम रखा, अदन बगीचा। वह चाहता था कि सारी धरती ठीक उस बगीचे की तरह बन जाए।

लेकिन ज़रा फिर से इस बगीचे को देखिए। पता है परमेश्वर को इसमें क्या कमी नज़र आयी? आइए आगे देखें।

उत्पत्ति 1:11-25; 2:8, 9.

उत्पत्ति 1:1,11-25
[1]आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की।
[11]फिर परमेश्वर ने कहा, पृथ्वी से हरी घास, तथा बीज वाले छोटे छोटे पेड़, और फलदाई वृक्ष भी जिनके बीज उन्ही में एक एक की जाति के अनुसार होते हैं पृथ्वी पर उगें; और वैसा ही हो गया।
[12]तो पृथ्वी से हरी घास, और छोटे छोटे पेड़ जिन में अपनी अपनी जाति के अनुसार बीज होता है, और फलदाई वृक्ष जिनके बीज एक एक की जाति के अनुसार उन्ही में होते हैं उगे; और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है।
[13]तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार तीसरा दिन हो गया॥
[14]फिर परमेश्वर ने कहा, दिन को रात से अलग करने के लिये आकाश के अन्तर में ज्योतियां हों; और वे चिन्हों, और नियत समयों, और दिनों, और वर्षों के कारण हों।
[15]और वे ज्योतियां आकाश के अन्तर में पृथ्वी पर प्रकाश देने वाली भी ठहरें; और वैसा ही हो गया।
[16]तब परमेश्वर ने दो बड़ी ज्योतियां बनाईं; उन में से बड़ी ज्योति को दिन पर प्रभुता करने के लिये, और छोटी ज्योति को रात पर प्रभुता करने के लिये बनाया: और तारागण को भी बनाया।
[17]परमेश्वर ने उन को आकाश के अन्तर में इसलिये रखा कि वे पृथ्वी पर प्रकाश दें,
[18]तथा दिन और रात पर प्रभुता करें और उजियाले को अन्धियारे से अलग करें: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है।
[19]तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार चौथा दिन हो गया॥
[20]फिर परमेश्वर ने कहा, जल जीवित प्राणियों से बहुत ही भर जाए, और पक्षी पृथ्वी के ऊपर आकाश के अन्तर में उड़ें।
[21]इसलिये परमेश्वर ने जाति जाति के बड़े बड़े जल-जन्तुओं की, और उन सब जीवित प्राणियों की भी सृष्टि की जो चलते फिरते हैं जिन से जल बहुत ही भर गया और एक एक जाति के उड़ने वाले पक्षियों की भी सृष्टि की: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है।
[22]और परमेश्वर ने यह कहके उनको आशीष दी, कि फूलो-फलो, और समुद्र के जल में भर जाओ, और पक्षी पृथ्वी पर बढ़ें।
[23]तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार पांचवां दिन हो गया।
[24]फिर परमेश्वर ने कहा, पृथ्वी से एक एक जाति के जीवित प्राणी, अर्थात घरेलू पशु, और रेंगने वाले जन्तु, और पृथ्वी के वनपशु, जाति जाति के अनुसार उत्पन्न हों; और वैसा ही हो गया।
[25]सो परमेश्वर ने पृथ्वी के जाति जाति के वन पशुओं को, और जाति जाति के घरेलू पशुओं को, और जाति जाति के भूमि पर सब रेंगने वाले जन्तुओं को बनाया: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है।

उत्पत्ति 2:8-9
[8]और यहोवा परमेश्वर ने पूर्व की ओर अदन देश में एक वाटिका लगाई; और वहां आदम को जिसे उसने रचा था, रख दिया।
[9]और यहोवा परमेश्वर ने भूमि से सब भांति के वृक्ष, जो देखने में मनोहर और जिनके फल खाने में अच्छे हैं उगाए, और वाटिका के बीच में जीवन के वृक्ष को और भले या बुरे के ज्ञान के वृक्ष को भी लगाया।

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